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यूपी में प्रदर्शन में शामिल हुए तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? चरित्र प्रमाण पत्र के सख्त नियम हुए जारी

 Reported By: Vishal Singh,  Written By: Kajal Kumari
 Published : Oct 29, 2026 11:10 am IST,  Updated : Oct 29, 2026 11:30 am IST

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए भर्तियों में वेरिफिकेशन के नियम में बड़ा बदलाव किया गया है। इसके तहत यूपी में अब हिंसक प्रदर्शन का हिस्सा बनने वाले युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। जानें क्या हैं नियम?

यूपी के सीएम योगी का सख्त फैसला- India TV Hindi
यूपी के सीएम योगी का सख्त फैसला

यूपी मे आवेदकों के चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त की गई है, जिसमें बताया गया है कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर ही किसी को अयोग्य नहीं माना जाएगा, लेकिन किसी भी तरह के हिंसक प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर सरकारी नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है। इस तरह से अब उत्तर प्रदेश में जो प्रदर्शन या फिर किसी हिंसक आंदोलन में शामिल होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। यूपी सरकार के इस आदेश में कहा गया है कि यूपी में किसी भी प्रदर्शन में शामिल होकर उसमें किसी भी तरह की हिंसा हुई तो ऐसे अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। 

ऑर्डर में लिखा प्वाइंट

  • यूपी मे आंदोलन में शामिल होने  के लिये हिंसा की तो सरकारी नौकरी से होंगे दूर।
  • सरकारी नौकरी के लिए आवेदकों के चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त कर दी है।
  • नए नियम के तहत यूपी के सरकारी विभागों, निगमों, परिषद और स्थानीय निकायों मे सीधी भर्ती के तहत चयन में चरित्र सत्यापन पर सख़्ती की गई है।
  • राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को नहीं माना जायेगा अयोग्य।
  • नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज की ओर से जारी किया निर्देश।
  • केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं माना जायेगा।
  • पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नहीं होगा सत्यापन।
  • पिछले विभाग से ली जा सकती है जानकारी, पुलिस को 30 दिन के भीतर देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट।

ऑर्डर में क्या कहा गया है?

उपरोक्त प्रस्तरों में किसी बात के होते हुये भी किसी व्यक्ति को मात्र उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण नियुक्ति हेतु अनुपयुक्त नहीं माना जायेगा किन्तु ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिसका संकल्पित उद्देश्य हिंसात्मक रीति से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है, सरकार के अधीन नियुक्ति के लिये अपात्र समझे जायेंगे। इक्कीस वर्ष की आय प्राप्त कर लेने के बाद और जांच के दिनांक से तीन वर्ष के भीतर किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग लेने को इस बात का प्रमाण माना जायेगा कि वह व्यक्ति अभी भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न है, जब तक कि समय के इस अन्तराल में उसकी प्रवृत्ति में परिवर्तन के सकारात्मक (ठोस) प्रमाण उपलब्ध न हो।

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